मुझे मेरा संसार चाहिए
नादां नहीं मैं जग से तेरे
मुझे मेरा संसार चाहिए
रण भूमि से थका नहीं हूं
मुझे मेरी तलवार चाहिए
कर्म क्षेत्र में जन्म हुआ है
मुझे मेरा अधिकार चाहिए
नया सवेरा लाना है अब
नहीं कोई अंधकार चाहिए
नादां नहीं मैं जग से तेरे
मुझे मेरा संसार चाहिए.....
ताज बने हिमशिखर से जिसके
पग बने नीर सागर से
तन चंचल मन कोमल है जिसका
चित भरे हैं चितकार से
अब पैरों पर खड़ा हूं मां देख जरा
मुझे तेरा श्रृंगार चाहिए
नादां नहीं मैं जग से तेरे
मुझे मेरा संसार चाहिए....
शांति प्रिय है देश मेरा
नहीं कोई भ्रष्टाचार चाहिए
अहिंसा मेरा धर्म रहा है
हिंसा का बहिष्कार चाहिए
नादां नहीं मैं जग से तेरे
मुझे मेरा संसार चाहिए....
बजरंग यादव
बेलादुला खर्राघाट रायगढ़ (छ.ग.)
9039024494
